Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 9 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 9 • ऋचा / मन्त्र 10

8.9.10

Mantra ID: 8.9.10

यद्वां कक्षीवाँ उत यद्वयश्च ऋषिर्यद्वां दीर्घतमा जुहाव. पृथी यद्वां वैन्यः सादनेष्वेवेदतो अश्विना चेतयेथाम्‌.. (१०)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.9.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार तुम्हें कक्षीवान्‌, व्यश्च एवं दीर्घतमा ऋषियों एवं राजा वेन के पुत्र पृथु ने अपनी यज्ञशाला में बुलाया था, उसी प्रकार मैं भी तुम्हारी स्तुति कर रहा हूं. तुम इसे जानो. (१०)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! Just as you were called to his yagyashala by the sages of Kshavivan, the man and the long-term sages, and Prithu, the son of King Ven, so too am I praising you. You know it. (10)

卐 HinduText AI