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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 106 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 106 • ऋचा / मन्त्र 5

9.106.5

Mantra ID: 9.106.5

इन्द्रा॑य॒ वृष॑णं॒ मदं॒ पव॑स्व वि॒श्वद॑र्शतः । स॒हस्र॑यामा पथि॒कृद्वि॑चक्ष॒णः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.106.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सबके दर्शनीय, हजारों मार्गो वाले, यजमानों को मार्ग दिखाने वाले एवं विशेष द्रष्टा सोम! तुम इंद्र के लिए अपना वर्षाकारक एवं नशीला रस टपकाओ. (५)

EN English Translation

O all seeable, with thousands of paths, who guides the hosts and the special seer Som! You pour your rainy and intoxicating juice for Indra. (5)

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