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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 107 • Mantra / Rik 17

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 107 • ऋचा / मन्त्र 17

9.107.17

Mantra ID: 9.107.17

इन्द्रा॑य पवते॒ मदः॒ सोमो॑ म॒रुत्व॑ते सु॒तः । स॒हस्र॑धारो॒ अत्यव्य॑मर्षति॒ तमी॑ मृजन्त्या॒यवः॑ ॥ (१७)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.107.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

नशीले एवं निचुड़े हुए सोम मरुतों सहित इंद्र के लिए छनते हैं. हजार धाराओं वाले सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को पार करते हैं. (१७)

EN English Translation

The intoxicating and uninhibited Som along with the maruts filter for Indra. Mons with thousand streams cross the dasapavitra made of sheep's hair. (17)

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