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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 32 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 32 • ऋचा / मन्त्र 2

9.32.2

Mantra ID: 9.32.2

आदीं॑ त्रि॒तस्य॒ योष॑णो॒ हरिं॑ हिन्व॒न्त्यद्रि॑भिः । इन्दु॒मिन्द्रा॑य पी॒तये॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.32.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

त्रित ऋषि की उंगलियां हरे रंग के सोम को इंद्र के पीने के लिए पत्थरों से कुचलती हैं. (२)

EN English Translation

The fingers of the sage Trinity crush the green-colored som with stones for Indra's drink. (2)

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