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9.51.1
अध्व॑र्यो॒ अद्रि॑भिः सु॒तं सोमं॑ प॒वित्र॒ आ सृ॑ज । पु॒नी॒हीन्द्रा॑य॒ पात॑वे ॥ (१)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 9.51.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अध्वर्युगण! पत्थरों की सहायता से पीसे हुए सोम को दशापवित्र पर डालो. तुम इसे इंद्र के पीने के लिए शुद्ध करो. (१)
EN English Translation
O teacher! Put the crushed mon on the dashapavitra with the help of stones. You purify it for Indra's drink. (1)