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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 51 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 51 • ऋचा / मन्त्र 2

9.51.2

Mantra ID: 9.51.2

दि॒वः पी॒यूष॑मुत्त॒मं सोम॒मिन्द्रा॑य व॒ज्रिणे॑ । सु॒नोता॒ मधु॑मत्तमम् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.51.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अध्वर्युगण! अत्यधिक मधुर, स्वर्ग के अमृत के समान एवं उत्तम सोम को वञ्जधारी इंद्र के लिए निचोड़ो. (२)

EN English Translation

O teacher! Squeeze the most sweet, the elixir of heaven and the perfect Soma for the vajjdhari Indra. (2)

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