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9.61.4
पव॑मानस्य ते व॒यं प॒वित्र॑मभ्युन्द॒तः । स॒खि॒त्वमा वृ॑णीमहे ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.61.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे टपकने वाले एवं दशापवित्र को गीला करने वाले सोम! हम तुमसे मित्रता की प्रार्थना करते हैं. (४)
EN English Translation
O soothing and wetting mon of dashapavitra! We pray to you for friendship. (4)