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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 61 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 5

9.61.5

Mantra ID: 9.61.5

ये ते॑ प॒वित्र॑मू॒र्मयो॑ऽभि॒क्षर॑न्ति॒ धार॑या । तेभि॑र्नः सोम मृळय ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.61.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम्हारी जो लहरें धारा के रूप में दशापवित्र पर गिरती हैं, हमें उसके द्वारा सुखी करो. (५)

EN English Translation

Hey Mon! Make us happy by the waves that fall on the dashapavitra as a stream of yours. (5)

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