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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 62 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 62 • ऋचा / मन्त्र 10

9.62.10

Mantra ID: 9.62.10

अ॒यं विच॑र्षणिर्हि॒तः पव॑मानः॒ स चे॑तति । हि॒न्वा॒न आप्यं॑ बृ॒हत् ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.62.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये विशेष द्रष्टा, पात्रों में रखे हुए एवं पवित्र होते हुए सोम! जल में उत्पन्न महान्‌ अन्न को प्रेरित करते हुए सबके द्वारा जाने जाते हैं. (१०)

EN English Translation

These special seers, kept in the characters and being holy Mon! They are known by all by everyone, inspiring the great food produced in the water. (10)

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