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सामवेद

Chapter / Prapathak 10 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 10 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 4

10.3.4

Mantra ID: 10.3.4

तिस्रो वाच ईरयति प्र वह्निरृतस्य धीतिं ब्रह्मणो मनीषाम् । गावो यन्ति गोपतिं पृच्छमानाः सोमं यन्ति मतयो वावशानाः ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 10.3.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! यजमान ऋक्‌, यजु और साम रूप तीन वाणियों से आप का गुणगान करते हैं. ब्राह्मण और मनीषी उसी प्रकार आप को खोजते (पूछते हुए) आते हैं, जिस प्रकार गाएं बैल के पास जाती हैं. (४)

EN English Translation

O Mon! The host praises you with the three words of the form of Rik, Yaju and Saam. Brahmins and mystics come looking for you in the same way as cows go to the bull. (4)

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