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सामवेद

Chapter / Prapathak 11 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 11 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 5

11.2.5

Mantra ID: 11.2.5

आविवासन्परावतो अथो अर्वावतः सुतः । इन्द्राय सिच्यते मधु ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 11.2.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! छानने के बाद आप का रस दूर और पास के देवताओं को भेंट किया जाता है. इंद्र के लिए मधुर सोमरस का सिंचन किया जाता है. (५)

EN English Translation

O Mon! After filtering, your juice is offered away and to the nearby gods. Madhur Someras is irrigated for Indra. (5)

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