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सामवेद

Chapter / Prapathak 12 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 12 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 1

12.3.1

Mantra ID: 12.3.1

तव श्रियो वर्ष्यस्येव विद्युतोग्नेश्चिकित्र उषसामिवेतयः । यदोषधीरभिसृष्टो वनानि च परि स्वयं चिनुषे अन्नमासनि ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 12.3.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! जब हम अन्न और वनस्पतियों को आप के मुंह में डालते हैं, उस समय आप की लपटें वर्षा के समय चमकने वाली बिजली और उषा के प्रकाश की तरह दृष्टिगोचर होती हैं. (१)

EN English Translation

O agni! When we put food and vegetation in your mouth, at that time your flames are visible like the light of lightning and usha shining at the time of rain. (1)

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