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सामवेद

Chapter / Prapathak 12 • Dashati / Sukta 6 • Mantra 13

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 12 • दशती / सूक्त 6 • मन्त्र 13

12.6.13

Mantra ID: 12.6.13

अध धारया मध्वा पृचानस्तिरो रोम पवते अद्रिदुग्धः । इन्दुरिन्द्रस्य सख्यं जुषाणो देवो देवस्य मत्सरो मदाय ॥ (१३)

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सामवेद मन्त्र 12.6.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! पत्थरों से कूट कर आप का रस निकाला जाता है. आप की धारा तेज से युक्त सुख देने वाली, मधुर और इंद्र की मित्रता चाहने वाली है. वह देवों के लिए आनंददायी, स्फूर्तिदायी व तृप्तिदायी है. (१३)

EN English Translation

O Mon! Your juice is extracted by crushing with stones. Your stream is full of happiness, sweet and loving the friendship of Indra. He is blissful, energizing and satisfying for the gods. (13)

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