Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 12 • Dashati / Sukta 6 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 12 • दशती / सूक्त 6 • मन्त्र 5

12.6.5

Mantra ID: 12.6.5

आ वच्यस्व सुदक्ष चम्वोः सुतो विशां वह्निर्न विश्पतिः । वृष्टिं दिवः पवस्व रीतिमपो जिन्वन्गविष्टये धियः ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 12.6.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप बुद्धिमान हैं. आप यजमान को भी ऐसी बुद्धि देते हैं, जिस से वे उपयुक्त मार्ग पर जा सकें. आप राजा की भांति सब का भरणपोषण करते हैं. आप स्वर्गलोक से होने वाली वर्षा की तरह बरसिए (प्रवाहित होइए). आप द्रोणकलश में स्थापित होने की कृपा कीजिए. (५)

EN English Translation

O Mon! You are intelligent. You also give the host such intelligence that they can go on the right path. You feed everyone like a king. You rain like rain from heaven( flow). Please be established in Drona kalash. (5)

卐 HinduText AI