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सामवेद

Chapter / Prapathak 12 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 3

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 12 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 3

12.7.3

Mantra ID: 12.7.3

ओभे सुश्चन्द्र विश्पते दर्वी श्रीणीष आसनि । उतो न उत्पुपूर्या उक्थेषु शवसस्पत इषँ स्तोतृभ्य आ भर ॥ (३)

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सामवेद मन्त्र 12.7.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप प्रजापालक, शक्तिमान और प्रकाशित हैं. आहुति देते समय मुख्य पात्र आप के मुख तक पहुंच जाते हैं. उपासक हवि भेंट कर के आप को प्रसन्न करना चाहते हैं. आप यजमानों को भरपूर वैभव प्रदान करने की कृपा कीजिए. (३)

EN English Translation

O agni! You are prajapalak, shaktimaan and prakash. While offering sacrifices, the main characters reach your mouth. The worshippers want to please you by offering havi. Please give full glory to the hosts. (3)

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