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सामवेद

Chapter / Prapathak 12 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 12 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 5

12.7.5

Mantra ID: 12.7.5

त्वमिन्द्राभिभूरसि त्वँ सूर्यमरोचयः । विश्वकर्मा विश्वदेवो महाँ असि ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 12.7.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप विश्व (संपूर्ण संसार के देव) और विश्वकर्मा (विश्व के संपूर्ण कार्य करने वाले) हैं. आप सूर्य को चमकाते हैं. आप की भूरिभूरि प्रशंसा की जाती है. (५)

EN English Translation

O Indra! You are vishwa (god of the whole world) and Vishwakarma (the complete work of the world). You shine the sun. You are admired. (5)

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