Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 14 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 14 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 7

14.2.7

Mantra ID: 14.2.7

स वायुमिन्द्रमश्विना साकं मदेन गच्छति । रणा यो अस्य धर्मणा ॥ (७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 14.2.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो यजमान धर्मपूर्वक सोमरस को निचोड़ते हैं, वे वायु, इंद्र और अश्विनीकुमारों के साथ आनंद प्राप्त करते हैं. (७)

EN English Translation

The hosts who religiously squeeze Someras attain bliss with vayu, indra and ashwinikumaras. (7)

卐 HinduText AI