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सामवेद

Chapter / Prapathak 14 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 14 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 2

14.3.2

Mantra ID: 14.3.2

त्वां विश्वे अमृत जायमानँ शिशुं न देवा अभि सं नवन्ते । तव क्रतुभिरमृतत्वमायन्वैश्वानर यत्पित्रोरदीदेः ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 14.3.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप विश्व रूप व अमृत स्वरूप हैं. आप संसार के स्वामी (नायक) हैं. आप यज्ञों द्वारा अमरता पाते हैं. आप की कृपा से यजमान दिव्यता प्राप्त करते हैं. (२)

EN English Translation

O agni! You are the world form and nectar form. You are the master (hero) of the world. You find immortality through sacrifices. By your grace, the host attains divinity. (2)

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