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सामवेद

Chapter / Prapathak 14 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 14 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 6

14.5.6

Mantra ID: 14.5.6

प्र सोम याहीन्द्रस्य कुक्षा नृभिर्येमानो अद्रिभिः सुतः ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 14.5.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पत्थरों से कूट कर निकाले हुए सोमरस को यजमानों ने स्तुतियों से परिष्कृत कर दिया है. वह सोमरस इंद्र के पेट में पहुंचने की कृपा करे. (६)

EN English Translation

Someras, crushed with stones, has been refined by the hosts with praises. May he please reach someras indra's stomach. (6)

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