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सामवेद

Chapter / Prapathak 14 • Dashati / Sukta 6 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 14 • दशती / सूक्त 6 • मन्त्र 4

14.6.4

Mantra ID: 14.6.4

त्वं न इन्द्रा भर ओजो नृम्णँ शतक्रतो विचर्षणे । आ वीरं पृतनासहम् ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 14.6.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप ओजस्वी, विलक्षण और सैकड़ों कर्म करने वाले हैं. आप पधारिए और हमें वीरपुत्र प्रदान करने की कृपा कीजिए. (४)

EN English Translation

O Indra! You are energetic, extraordinary and do hundreds of deeds. Please come and give us the son of Veer. (4)

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