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सामवेद

Chapter / Prapathak 15 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 15 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 5

15.2.5

Mantra ID: 15.2.5

अत्या हियाना न हेतृभिरसृग्रं वाजसातये । वि वारमव्यमाशवः ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 15.2.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप अग्रगण्य हैं. यजमान आप को अन्न प्राप्ति के लिए गतिपूर्वक परिष्कृत करते हैं. (५)

EN English Translation

O Mon! You are the forward. Hosts refine you dynamically to get food. (5)

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