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सामवेद

Chapter / Prapathak 15 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 15 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 6

15.2.6

Mantra ID: 15.2.6

ते नः सहस्रिणँ रयिं पवन्तामा सुवीर्यम् । सुवाना देवास इन्दवः ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 15.2.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप सहस्र धार वाले, पवित्र और धनवान हैं. हमें देवत्व प्रदान करें. (६)

EN English Translation

O Mon! You are thousands of sharp, holy and wealthy. Give us divinity. (6)

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