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सामवेद

Chapter / Prapathak 15 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 15 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 4

15.5.4

Mantra ID: 15.5.4

अपघ्नन्पवते मृधोऽप सोमो अराव्णः । गच्छन्निन्द्रस्य निष्कृतम् ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 15.5.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोमरस इंद्र के पवित्र स्थान तक (पवित्र हो कर) पहुंचता है. वह मधुर और जल मिश्रित है. उस के विकारों को दूर कर के उसे स्वच्छ कर दिया गया है. (४)

EN English Translation

Someras reaches the holy place of Indra (by becoming holy). She is sweet and water mixed. His disorders have been removed and cleaned. (4)

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