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सामवेद

Chapter / Prapathak 15 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 15 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 5

15.5.5

Mantra ID: 15.5.5

महो नो राय आ भर पवमान जही मृधः । रास्वेन्दो वीरवद्यशः ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 15.5.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप पवित्र हैं. आप हमें धनवान तथा वीरों की भांति यशस्वी बनाने की कृपा कीजिए. (५)

EN English Translation

O Mon! You are holy. Please make us rich and as successful as heroes. (5)

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