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सामवेद

Chapter / Prapathak 15 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 15 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 6

15.5.6

Mantra ID: 15.5.6

न त्वा शतं च न ह्रुतो राधो दित्सन्तमा मिनन् । यत्पुनानो मखस्यसे ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 15.5.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप पवित्र हैं. आप को अपने यज्ञकर्ताओं को धन देने से कोई नहीं रोक सकता, यहां तक कि सैकड़ों शत्रु भी. (६)

EN English Translation

O Mon! You are holy. No one can stop you from giving money to your yagyakars, even hundreds of enemies. (6)

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