Samaveda Quick Jump
Navigate to any Chapter / Prapathak or Mantra
16.11.8
द्विर्यं पञ्च स्वयशसँ सखायो अद्रिसँहतम् । प्रियमिन्द्रस्य काम्यं प्रस्नापयन्त ऊर्मयः ॥ (८)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
सामवेद मन्त्र 16.11.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
सोमरस पत्थरों से कूट कर निकाला जाता है. इन्हें दोनों हाथों की दस अंगुलियां साफ करती हैं और जलमय बनाती हैं. ये तरंगों की तरह लहराते हैं. ये सभी को प्रिय, सभी के मित्र और इंद्र के काम्य (चाहे गए) हैं. (८)
EN English Translation
Somers is crushed with stones. Ten fingers of both hands clean them and make them watery. They wave like waves. They are dear to all, friends of all and kamya (wanted) of Indra. (8)