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सामवेद

Chapter / Prapathak 16 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 16 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 2

16.3.2

Mantra ID: 16.3.2

एतं त्रितस्य योषणो हरिँ हिन्वन्त्यद्रिभिः । इन्दुमिन्द्राय पीतये ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 16.3.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र के पीने के लिए हरित कांति वाला सोमरस पत्थरों से त्रित (तीन प्रकार से स्तुतियों के साथ पवित्र किया जाता हुआ) कूटा जा रहा है. (२)

EN English Translation

For Indra to drink, someras with green radiance is being crushed with stones (sanctified with praises in three ways). (2)

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