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सामवेद

Chapter / Prapathak 16 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 16 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 5

16.7.5

Mantra ID: 16.7.5

येन देवाः पवित्रेणात्मानं पुनते सदा । तेन सहस्रधारेण पावमानीः पुनन्तु नः ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 16.7.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवतागण जिन से सदा अपने को निर्मल (पवित्र) बनाते हैं, वैसी ही हजारों धाराओं से वेदों के मंत्र हमें पवित्र बनाने की कृपा करें. (५)

EN English Translation

May the deities always make themselves pure, may the mantras of the Vedas from thousands of streams make us pure. (5)

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