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सामवेद

Chapter / Prapathak 17 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 3

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 17 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 3

17.2.3

Mantra ID: 17.2.3

स वर्धिता वर्धनः पूयमानः सोमो मीढ्वाँ अभि नो ज्योतिषावीत् । यत्र नः पूर्वे पितरः पदज्ञाः स्वर्विदो अभि गा अद्रिमिष्णन् ॥ (३)

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सामवेद मन्त्र 17.2.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम बढ़ोतरी पाने वाले, देवताओं की बढ़ोतरी करने वाले और अभीष्ट साधने वाले हैं. छना हुआ सोमरस सब प्रकार से हमारी रक्षा करे. आत्म तत्त्व ज्ञाता हमारे पूर्व पितर अपनी यज्ञीय गायों को सोम से भरे हुए पहाड़ों के पास ले जाया करते थे. (३)

EN English Translation

Soma is the one who gets the increase, the one who increases the gods and the one who wants. May the filtered Somerus protect us in every way. Our former ancestors used to take their sacrificial cows to the mountains full of soma. (3)

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