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सामवेद

Chapter / Prapathak 17 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 17 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 5

17.3.5

Mantra ID: 17.3.5

तमग्निमस्ते वसवो न्यृण्वन्त्सुप्रतिचक्षमवसे कुतश्चित् । दक्षाय्यो यो दम आस नित्यः ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 17.3.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप ज्वलनशील प्रकाशमान हैं. आप को हम घर में प्रज्वलित करते हैं. आप सुंदर (दर्शनीय) स्वरूप वाले हैं. यजमान अपनी रक्षा के लिए आप को यज्ञ में प्रतिष्ठित करते हैं. (५)

EN English Translation

O agni! You are flammable light. We ignite you in the house. You are beautiful. The hosts establish you in the yagna to protect themselves. (5)

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