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सामवेद

Chapter / Prapathak 17 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 9

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 17 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 9

17.3.9

Mantra ID: 17.3.9

त्रिँशद्धाम वि राजति वाक्पतङ्गाय धीयते । प्रति वस्तोरह द्युभिः ॥ (९)

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सामवेद मन्त्र 17.3.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

तीस घड़ियों (१२ घंटे) तक अग्नि (सूर्य रूप में) अपनी तेजोमयता से प्रकाशमान रहते हैं. उस समय स्वर्गलोक द्वारा आप को यजमानों की बुद्धिपूर्वक की गई स्तुतियां प्राप्त होती हैं. (९)

EN English Translation

For thirty clocks (12 hours), agni (in the form of sun) is illuminated with its brightness. At that time, you receive the praises of the hosts wisely by heaven. (9)

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