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सामवेद

Chapter / Prapathak 18 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 9

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 18 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 9

18.1.9

Mantra ID: 18.1.9

आ जामिरत्के अव्यत भुजे न पुत्र ओण्योः । सरज्जारो न योषणां वरो न योनिमासदम् ॥ (९)

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सामवेद मन्त्र 18.1.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम भाई जैसे प्रिय हैं, मातापिता की भुजाओं में संरक्षित बेटे जैसे हैं व कामी आदमी जैसे स्त्री की ओर और वर कन्या की ओर आकर्षित होता है, वैसे ही सोम द्रोणकलश की ओर जा रहे हैं. (९)

EN English Translation

As Som Bhai is dear, like a son protected in the arms of his parents and a kami man is attracted to a woman and a groom to a girl, So Som is going towards Dronakalash. (9)

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