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सामवेद

Chapter / Prapathak 18 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 18 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 7

18.4.7

Mantra ID: 18.4.7

त्वमिन्द्र यशा अस्यृजीषी शवसस्पतिः । त्वं वृत्राणि हँस्यप्रतीन्येक इत्पुर्वनुत्तश्चर्षणीधृतिः ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 18.4.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप यशस्वी, धैर्यवान, दुश्मनों को मारने वाले व शक्ति के स्वामी हैं. आप जैसे देवता के बारे में हम ने पहले नहीं सुना. (७)

EN English Translation

O Indra! You are successful, patient, kill enemies and master of power. We haven't heard of a god like you before. (7)

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