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सामवेद

Chapter / Prapathak 18 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 9

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 18 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 9

18.5.9

Mantra ID: 18.5.9

त्रिरस्मै सप्त धेनवो दुदुह्रिरे सत्यामाशिरं परमे व्योमनि । चत्वार्यन्या भुवनानि निर्णिजे चारूणि चक्रे यदृतैरवर्धत ॥ (९)

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सामवेद मन्त्र 18.5.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! परम व्योम में सात से तीन गुनी अर्थात्‌ इक्कीस गाएं श्रेष्ठ दूध देती हैं. चार अन्य लोकों के सुंदर जल से सोम की बढ़ोतरी होती है. सोमरस कल्याणकारी चक्र से (क्रम से) प्रवाहित होता है. (९)

EN English Translation

O Mon! In Param Vyom, seven to three times i.e. twenty-one cows give the best milk. The beautiful water of the four other worlds increases soma. Someras flows (in order) from the welfare cycle. (9)

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