Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 19 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 19 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 1

19.5.1

Mantra ID: 19.5.1

अयँ सोम इन्द्र तुभ्यँ सुन्वे तुभ्यं पवते त्वमस्य पाहि । त्वँ ह यं चकृषे त्वं ववृष इन्दुं मदाय युज्याय सोमम् ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 19.5.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप के लिए सोमरस तैयार किया जाता है. आप इस को पीजिए. आप ही उस को बरसाते हैं, उपजाते हैं. आप आनंद हेतु इसे ग्रहण कीजिए. आप हमें इस से मिलाइए. हम आप की शरण में हैं. (१)

EN English Translation

O Indra! Somers is prepared for you. You drink this. You rain it, you grow it. You accept it for pleasure. You introduce us to this. We are in your shelter. (1)

卐 HinduText AI