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सामवेद

Chapter / Prapathak 21 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 21 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 6

21.1.6

Mantra ID: 21.1.6

वृषणं त्वा वयं वृषन्वृषणः समिधीमहि । अग्ने दीद्यतं बृहत् ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 21.1.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप शक्तिमान हैं. हम शक्तिमान आप को प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं. हम समिधाओं से आप को प्रज्वलित करते हैं. आप दीप्तिमान व विशाल हैं. (६)

EN English Translation

O agni! You are powerful. We wish to get the powerful you. We ignite you with samidhas. You are radiant and huge. (6)

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