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सामवेद

Chapter / Prapathak 22 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 22 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 6

22.1.6

Mantra ID: 22.1.6

इन्द्राग्नी तविषाणी वाँ सधस्थानि प्रयाँसि च । युवोरप्तूर्यँ हितम् ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 22.1.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हे अग्नि! आप हित साधने वाले हैं. आप के प्रयास सदैव शुभ कार्यो की ओर लगे रहते हैं. (६)

EN English Translation

O Indra! O agni! You are an interest seeker. Your efforts are always engaged towards auspicious works. (6)

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