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सामवेद

Chapter / Prapathak 22 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 22 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 7

22.1.7

Mantra ID: 22.1.7

शग्ध्यू३ षु शचीपत इन्द्र विश्वाभिरूतिभिः । भगं न हि त्वा यशसं वसुविदमनु शूर चरामसि ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 22.1.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप शचीपति, शक्तिमान, धनवान, सौभाग्यवान और यशस्वी हैं. हम आप का अनुगमन करते हैं. (७)

EN English Translation

O Indra! You are a saturn, powerful, rich, fortunate and successful. We follow you. (7)

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