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सामवेद

Chapter / Prapathak 22 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 22 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 1

22.4.1

Mantra ID: 22.4.1

मा भेम मा श्रमिष्मोग्रस्य सख्ये तव । महत्ते वृष्णो अभिचक्ष्यं कृतं पश्येम तुर्वशं यदुम् ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 22.4.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम आप के मित्र हैं, इस कारण हम कभी भी श्रम से थके नहीं, कभी भी किसी से डरे नहीं. आप महान हैं. आप की कृपा सराहनीय है. तुर्वश और यदु दोनों ही प्रसन्न दिखाई देते हैं. (१)

EN English Translation

O Indra! We are your friends, that is why we have never been tired of labor, never afraid of anyone. You are great. Your grace is commendable. Both Turvash and Yadu appear happy. (1)

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