Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 23 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 23 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 1

23.2.1

Mantra ID: 23.2.1

वायो शुक्रो अयामि ते मध्वो अग्रं दिविष्टिषु । आ याहि सोमपीतये स्पार्हो देव नियुत्वता ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 23.2.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वायु! हम यज्ञ में सब से पहले आप को सोमरस चढ़ाते हैं. आप आदरणीय हैं. हे देव! आप नियुत नामक घोड़े के साथ सोमपान के लिए आ जाइए. (१)

EN English Translation

O wind! We offer someras to you first in the yajna. You are respected. O God! You come to Sompan with a horse called Nyut. (1)

卐 HinduText AI