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सामवेद

Chapter / Prapathak 23 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 23 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 5

23.2.5

Mantra ID: 23.2.5

तमस्य मर्जयामसि मदो य इन्द्रपातमः । यं गाव आसभिर्दधुः पुरा नूनं च सूरयः ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 23.2.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोमरस मददायी है. यह इंद्र के पीने योग्य है. इसे आज भी पीया जाता है. यह पहले भी पीया जाता था. सोम को गाएं भी खुशीखुशी खाती हैं. (५)

EN English Translation

Someras is intoxicating. It is indra's drinkable. It is still drunk today. It was drunk earlier too. Songs on Som also eat happiness. (5)

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