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सामवेद

Chapter / Prapathak 23 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 23 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 1

23.3.1

Mantra ID: 23.3.1

यज्ञ इन्द्रमवर्धयद्यद्भूमिं व्यवर्तयत् । चक्राण ओपशं दिवि ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 23.3.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यज्ञ इंद्र की बढ़ोतरी व भूमि को विस्तृत करते हैं. वे स्वर्गलोक से मेघों को वर्षा के लिए प्रेरित करते हैं. (१)

EN English Translation

Yajna expands indra's growth and land. They inspire clouds from heaven to rain. (1)

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