Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 24 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 11

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 24 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 11

24.1.11

Mantra ID: 24.1.11

न घा वसुर्नि यमते दानं वाजस्य गोमतः । यत्सीमुपश्रवद्गिरः ॥ (११)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 24.1.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! स्तुति से भरी हुई हमारी वाणियां जब आप के समीप पहुंचती हैं तो आप यजमान को धनवान और गोवान बनाने में नहीं चूकते हैं. (११)

EN English Translation

O Indra! When our words full of praise reach you, you do not fail to make the host rich and goan. (11)

卐 HinduText AI