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सामवेद

Chapter / Prapathak 24 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 24 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 5

24.2.5

Mantra ID: 24.2.5

तद्विप्रासो विपन्युवो जागृवाँसः समिन्धते । विष्णोर्यत्परमं पदम् ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 24.2.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जाग्रत यजमान अपने श्रेष्ठ यज्ञ कर्मो से विष्णु के श्रेष्ठ पद को प्राप्त करते हैं. (५)

EN English Translation

The awakened host attains the best position of Vishnu through his best yajna karma. (5)

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