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सामवेद

Chapter / Prapathak 24 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 3

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 24 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 3

24.4.3

Mantra ID: 24.4.3

पवमानास आशवः शुभ्रा असृग्रमिन्दवः । घ्नन्तो विश्वा अप द्विषः ॥ (३)

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सामवेद मन्त्र 24.4.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप का रस पवित्र और चमकीला है. वह (स्वास्थ्य संबंधी) सभी गड़बड़ियों का नाश करता है. आप जल्दी द्रोणकलश में पधारते हैं. (३)

EN English Translation

O Mon! Your juice is pure and bright. He destroys all (health) disturbances. You get to Dronalash quickly. (3)

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