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सामवेद

Chapter / Prapathak 24 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 24 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 7

24.4.7

Mantra ID: 24.4.7

उप त्वा रण्वसन्दृशं प्रयस्वन्तः सहस्कृत । अग्ने ससृज्महे गिरः ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 24.4.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप (अरणियों में) रगड़ से पैदा होते हैं. आप दर्शनीय हैं. हम वाणी से आप की स्तुति करते हैं. हम आप की समीपता चाहते हैं. हम आप की उपासना करते हैं. (७)

EN English Translation

O agni! You are born by rubbing (in the arrays). You are visible. We praise you with speech. We want your proximity. We worship you. (7)

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