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सामवेद

Chapter / Prapathak 24 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 9

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 24 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 9

24.4.9

Mantra ID: 24.4.9

य उग्र इव शर्यहा तिग्मश‍ृङ्गो न वँसगः । अग्ने पुरो रुरोजिथ ॥ (९)

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सामवेद मन्त्र 24.4.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप उग्र, वीर व धनुर्धर हैं. आप की ज्वालाएं (बैलों के) तीखे सींग की भांति हैं. आप ने दुश्मनों के ठिकानों को नष्ट किया है. (९)

EN English Translation

O agni! You are fierce, brave and archer. Your flames are like sharp horns (of bulls). You have destroyed enemy bases. (9)

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