Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 27 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 27 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 7

27.1.7

Mantra ID: 27.1.7

अभि गोत्राणि सहसा गाहमानोऽदयो वीरः शतमन्युरिन्द्रः । दुश्च्यवनः पृतनाषाडयुध्यो३ऽस्माकँ सेना अवतु प्र युत्सु ॥ (७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 27.1.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप हमारी व सेनाओं की रक्षा कीजिए. आप अदभुत युद्धवीर, शत्रुजित्‌, स्थिर, वीर, अनीति के प्रति क्रोधी व शत्रु पर दया न करने वाले हैं. आप शत्रु के गढ़ भेदने वाले हैं. (७)

EN English Translation

O Indra! You protect us and our forces. You are a wonderful warrior, enemy, stable, brave, angry towards immorality and not pitying the enemy. You are going to penetrate the enemy's stronghold. (7)

卐 HinduText AI