Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 3 • Dashati / Sukta 10 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 3 • दशती / सूक्त 10 • मन्त्र 2

3.10.2

Mantra ID: 3.10.2

वृत्रस्य त्वा श्वसथादीषमाणा विश्वे देवा अजहुर्ये सखायः । मरुद्भिरिन्द्र सख्यं ते अस्त्वथेमा विश्वाः पृतना जयासि ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 3.10.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! सभी सहायक देवतागण वृत्रासुर से डर कर आप का साथ छोड़ कर भाग गए (चले गए). उन सब के चले जाने पर आप ने मरुदगणों की मित्रता के कारण उन के सहयोग से दुश्मनों की सेना को हराया. (२)

EN English Translation

O Indra! All the supporting gods, fearing Vritrasura, left you and fled (left). When all of them left, you defeated the army of enemies with their cooperation due to the friendship of the Marudgans. (2)

卐 HinduText AI