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सामवेद

Chapter / Prapathak 3 • Dashati / Sukta 11 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 3 • दशती / सूक्त 11 • मन्त्र 6

3.11.6

Mantra ID: 3.11.6

यं वृत्रेषु क्षितय स्पर्धमाना यं युक्तेषु तुरयन्तो हवन्ते । यँ शूरसातौ यमपामुपज्मन्यं विप्रासो वाजयन्ते स इन्द्रः ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 3.11.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! यजमान युद्ध में सहायता के लिए आप को पुकारते हैं. आप उन की पुकार सुनते हैं. आप अस्त्रशस्त्र वाले योद्धाओं के बुलाने पर उन की सहायता करते हैं. जल वर्षा के लिए आप से ही निवेदन किया जाता है. ब्राह्मणगण आप को ही हवि समर्पित करते हैं. (६)

EN English Translation

O Indra! The hosts call on you for assistance in the war. You hear their call. You help armed warriors when they call them. You are requested for water rain. Brahmins dedicate havi to you. (6)

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